सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कचोरी बनाने की विधि हिंदी में

कचौरी एक पारम्परिक व्यंजन है, जो आमतौर से किसी विशेष अवसर जैसे कि त्यौहार अथवा किसी पार्टी आदि के मौके पर बनाई जाती है। यह बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी पसंद आती है। इसकी इस लोकप्रियता राज इसके मसालों के साथ-साथ इसके खस्तापन में भी छुपा होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पिछले दिनों 'लज़ीज़ खाना' पर उड़द दाल की कचौरी रेसिपी शेयर की गयी थी। उसी क्रम में आज स्पेशल बेसन कचौरी रेसिपी आपकी सेवा में प्रस्तुत है। आशा है यह भी आपको पसंद आएगी।

आवश्यक सामग्री:
मैदा-22 कप, घी/तेल-चौथाई (1/4) कप, नमक-स्वादानुसार।

भरवान (स्टफिंग) के लिए सामग्री: बेसन-आधा कप, हरी मिर्च-02 (बारीक कटी हुई), अदरक पेस्ट-आधा छोटा चम्मच, सौंफ-01 छोटा चम्मच (दरदरी कुटी), जीरा-आधा छोटा चम्मच, हींग-01 चुटकी, गरम मसाला-आधा छोटा चम्मच, आमचूर पाउडर-आधा छोटा चम्मच, धनिया पाउडर-आधा छोटा चम्मच, लाल मिर्च-चौथाई (1/4) छोटा चम्मच, तेल-कचौरी तलने के लिये, नमक-स्वादानुसार।
खस्ता बेसन कचौरी बनाने की विधि:
सबसे पहले मैदा को एक बर्तन में निकाल लें। फिर उसमें पिघला हुआ घी और नमक डाल दें। उसके बाद उसे पानी की सहायता से मुलायम गूंथ लें। उसके बाद उसके एक गीले कपड़े से ढ़क कर बीव मिनट के लिए रख दें।

अब एक कढ़ाई में दो बड़े चम्मच तेल डाल कर गर्म करें। तेल गरम होने पर उसमें जीरा और हींग डाल दें तथा उसे भून लें। जीरा भुनने के बाद अदरक पेस्ट, हरी मिर्च, लाल मिर्च डालें तथा अन्य मसाले डालें और चला कर भून लें। मसाले भुन जाने के बाद उसमें बेसन डालें और और उसे भी चलाते हुए भून लें। अब इस मिश्रण में अमचूर पाउडर और नमक भी मिला दें और बेसन की महक आने तक मिश्रण को अच्छी तरह से भून लें। भुनने के बाद आपकी भरावन तैयार है। इसे गैस से उतार लें और ठंडा होने दें।

अब गुंथे हुए आटे को लेकर उसकी छोटी-छोटी लोई बनाएं। लोई बनाने के बाद उसे पूरी के आकार में बेल लें। पूरी के बीच में एक छोटा चम्मच भरावन रखें और और फिर उसे चारों ओर से उठाकर बंद कर दें और पुन: उसे बेल कर पूरी के आकार का बना लें।

इसी तरह से सारी कचौरियां तैयार होने के बाद एक कढ़ाई में तेल गर्म करें और आंच कम करके उसमें कचौरियां डालें। इन्हें सुनहरा भूरा होने (लगभग 10 मिनट) तक पलट-पलट कर तलें और फिर एक अलग बर्तन में निकाल लें। अब आपकी खस्ता बेसन कचौरियां तैयार हैं। इन्हें गर्मा-गरम प्लेट में निकालें और सब्जी अथवा मनचाही चटनी के साथ सर्व करें।

ये कचौरियां खरी तलने के बाद बेहद खस्ता हो जाती हैं, इसलिए इन्हें ठंडा करके एयर टाइट बर्तन में रख कर एक सप्ताह तक उपयोग में लाया जा सकता है। 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"आम खाने के आयुर्वेदिक उपाय: पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए जानिए कुछ आसान उपाय"

"आम खाने के आयुर्वेदिक उपाय: पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए जानिए कुछ आसान उपाय" आम एक फल है जो भारत के सभी भागों में पाया जाता है। यह एक खुशबूदार और स्वादिष्ट फल है जिसे समूचे विश्व में बड़े पसंद किया जाता है। इसके अलावा, आम के कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं जो इसे औषधि के रूप में भी उपयोगी बनाते हैं। नीचे दिए गए हैं कुछ रोचक जानकारियां जो आपको आम के बारे में और अधिक जानने में मदद करेंगी: आम का नाम फलों के राजा क्यों है? इसलिए कि यह फल अन्य फलों से अधिक मीठा होता है। इसके अलावा, यह फल बहुत सुकूनदायक भी होता है और इसे खाने से मन और शरीर दोनों को फ्रेश महसूस होता है। आम में विटामिन सी, विटामिन ए और फोलेट होते हैं। इन सभी तत्वों का सेवन हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है। विटामिन सी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, वहीं विटामिन ए हमारी आंखों के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। आम में फाइबर भी होता है, जो हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके अलावा, आम में कैरोटीन भी होता है, जो हमारी त्वचा के लिए बहुत लाभदायक होता है। आम का उपयोग आपकी दांतों के लिए भी फायद...

🍃पुदीना : ठंडा-ठंडा, कूल-कूल पुदीने का रस पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है

कई बार हम साधारण सी बीमारी में भी घबरा जाते हैं लेकिन अगर हमें थोड़ा भी घरेलू नुस्खों के बारे में पता हो तो आसानी से तुरंत इलाज किया जा सकता है। दादी-नानी के खजाने से हम लेकर आए हैं ऐसे ही कुछ खास लाजवाब सरल-सहज नुस्खे, जिन्हें अपना कर आप भी पा सकते हैं निरोगी काया : • हैजे में पुदीना , प्याज का रस, नींबू का रस बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। उल्टी-दस्त, हैजा हो तो आधा कप पुदीना का रस हर दो घंटे से रोगी को पिलाएं। • ‎आंत्रकृमि में पुदीने का रस दें। • ‎अजीर्ण होने पर पुदीने का रस पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है। • ‎पेटदर्द और अरुचि में 3 ग्राम पुदीने के रस में जीरा, हींग, कालीमिर्च, कुछ नमक डालकर गर्म करके पीने से लाभ होता है। • ‎प्रसव के समय पुदीने का रस पिलाने से प्रसव आसानी से हो जाता है। • ‎बिच्छू या बर्रे के दंश स्थान पर पुदीने का अर्क लगाने से यह विष को खींच लेता है और दर्द को भी शांत करता है। • ‎दस ग्राम पुदीना व बीस ग्राम गुड़ दो सौ ग्राम पानी में उबालकर पिलाने से बार-बार उछलने वाली पित्ती ठीक हो जाती है। • ‎पुदीने को पानी में उबालकर थोड़ी चीनी मिलाकर उस...

आंवला लड्डू बनाने की विधि - Amla Laddu Recipe in Hindi

                         आंवला लड्डू बनाने की विधि                                      (Amla Laddu Recipe in Hindi) आंवला में विटामिन सी और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, इसलिए इसका उपयोग अध‍िक से अध‍िक करना चाहिए। इसके इस्तेमाल से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और हाजमा दुरूस्त होता है। इसके साथ ही यह आंखों और बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही यह बच्चों को भी बहुत पसंद आता है। आंवले की इन्हीं विशेषताओं को देखते हुए पिछले दिनों आंवले का मुरब्बा बनाने की विध‍ि बताई गयी थी। उसी क्रम में आज आंवले का लड्डू बनाने की रेसिपी प्रस्तुत है। आवश्यक सामग्री:   "आंवला लड्डू बनाने की विधि - Amla Laddu Recipe in Hindi" आंवला-500 ग्राम, चीनी-500 ग्राम, बादाम-50 ग्राम (पीस कर पाउडर बनाया हुआ), काजू-50 ग्राम (बारीक कतरे हुए), देशी घी-चार बड़े चम्मच, इलायची पाउडर-आधा छोटा चम्मच, जायफल पाउडर-आधा छोटा चम्मच। आंवला लड्...