सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पथरी का इलाज आयुरवैदिक

वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone
___________________________________________________

वृक्कों गुर्दों में पथरी होने का प्रारंभ में रोगी को कुछ पता नहीं चलता है, लेकिन जब वृक्कों से निकलकर पथरी मूत्रनली में पहुंच जाती है तो तीव्र शूल की उत्पत्ति करती है। पथरी के कारण तीव्र शूल से रोगी तड़प उठता है।

उत्पत्ति :
भोजन में कैल्शियम, फोस्फोरस और ऑक्जालिकल अम्ल की मात्रा अधिक होती है तो पथरी का निर्माण होने लगता है। उक्त तत्त्वों के सूक्ष्म कण मूत्र के साथ निकल नहीं पाते और वृक्कों में एकत्र होकर पथरी की उत्पत्ति करते हैं। सूक्ष्म कणों से मिलकर बनी पथरी वृक्कों में तीव्र शूल की उत्पत्ति करती है। कैल्शियम, फोस्फेट, कोर्बोलिक युक्त खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से पथरी का अधिक निर्माण होता है।

लक्षण :
पथरी के कारण मूत्र का अवरोध होने से शूल की उत्पत्ति होती है। मूत्र रुक-रुक कर आता है और पथरी के अधिक विकसित होने पर मूत्र पूरी तरह रुक जाता है। पथरी होने पर मूत्र के साथ रक्त भी निकल आता है। रोगी को हर समय ऐसा अनुभव होता है कि अभी मूत्र आ रहा है। मूत्र त्याग की इच्छा बनी रहती है। पथरी के कारण रोगी के हाथ-पांवों में शोध के लक्षण दिखाई देते हैं। मूत्र करते समय पीड़ा होती है। कभी-कभी पीड़ा बहुत बढ़ जाती है तो रोगी पीड़ा से तड़प उठता है। रोगी कमर के दर्द से भी परेशान रहता है।

क्या खाएं?
* वृक्कों में पथरी पर नारियल का अधिक सेवन करें।
* करेले के 10 ग्राम रस में मिसरी मिलाकर पिएं।
* पालक का 100 ग्राम रस गाजर के रस के साथ पी सकते हैं।
* लाजवंती की जड़ को जल में उबालकर कवाथ बनाकर पीने से पथरी का निष्कासन हो जाता है।
* इलायची, खरबूजे के बीजों की गिरी और मिसरी सबको कूट-पीसकर जल में मिलाकर पीने से पथरी नष्ट होती है।
* आंवले का 5 ग्राम चूर्ण मूली के टुकड़ों पर डालकर खाने से वृक्कों की पथरी नष्ट होती है।
* शलजम की सब्जी का कुछ दिनों तक निरंतर सेवन करें।
* गाजर का रस पीने से पथरी खत्म होती है।
* बथुआ, चौलाई, पालक, करमकल्ला या सहिजन की सब्जी खाने से बहुत लाभ होता है।
* वृक्कों की पथरी होने पर प्रतिदिन खीरा, प्याज व चुकंदर का नीबू के रस से बना सलाद खाएं।
* गन्ने का रस पीने से पथरी नष्ट होती है।
* मूली के 25 ग्राम बीजों को जल में उबालकर, क्वाथ बनाएं। इस क्वाथ को छानकर पिएं।
* चुकंदर का सूप बनाकर पीने से पथरी रोग में लाभ होता है।
* मूली का रस सेवन करने से पथरी नष्ट होती है।
* जामुन, सेब और खरबूजे खाने से पथरी के रोगी को बहुत लाभ होता है।
नोट: पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन करने से पहले चिकित्सक से अवश्य परामर्श कर लें।

क्या न खाएं?
* वृक्कों में पथरी होने पर चावलों का सेवन न करें।
* उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रस से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
* गरिष्ठ व वातकारक खाद्य व सब्जियों का सेवन न करें।
* चाय, कॉफी व शराब का सेवन न करें।
* चइनीज व फास्ट फूड वृक्कों की विकृति में बहुत हानि पहंुचाते हैं।
* मूत्र के वेग को अधिक समय तक न रोकें।
* अधिक शारीरिक श्रम और भारी वजन उठाने के काम न करें।

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

thanks for the best comment

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"आम खाने के आयुर्वेदिक उपाय: पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए जानिए कुछ आसान उपाय"

"आम खाने के आयुर्वेदिक उपाय: पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए जानिए कुछ आसान उपाय" आम एक फल है जो भारत के सभी भागों में पाया जाता है। यह एक खुशबूदार और स्वादिष्ट फल है जिसे समूचे विश्व में बड़े पसंद किया जाता है। इसके अलावा, आम के कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं जो इसे औषधि के रूप में भी उपयोगी बनाते हैं। नीचे दिए गए हैं कुछ रोचक जानकारियां जो आपको आम के बारे में और अधिक जानने में मदद करेंगी: आम का नाम फलों के राजा क्यों है? इसलिए कि यह फल अन्य फलों से अधिक मीठा होता है। इसके अलावा, यह फल बहुत सुकूनदायक भी होता है और इसे खाने से मन और शरीर दोनों को फ्रेश महसूस होता है। आम में विटामिन सी, विटामिन ए और फोलेट होते हैं। इन सभी तत्वों का सेवन हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है। विटामिन सी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, वहीं विटामिन ए हमारी आंखों के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। आम में फाइबर भी होता है, जो हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके अलावा, आम में कैरोटीन भी होता है, जो हमारी त्वचा के लिए बहुत लाभदायक होता है। आम का उपयोग आपकी दांतों के लिए भी फायद...

🍃पुदीना : ठंडा-ठंडा, कूल-कूल पुदीने का रस पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है

कई बार हम साधारण सी बीमारी में भी घबरा जाते हैं लेकिन अगर हमें थोड़ा भी घरेलू नुस्खों के बारे में पता हो तो आसानी से तुरंत इलाज किया जा सकता है। दादी-नानी के खजाने से हम लेकर आए हैं ऐसे ही कुछ खास लाजवाब सरल-सहज नुस्खे, जिन्हें अपना कर आप भी पा सकते हैं निरोगी काया : • हैजे में पुदीना , प्याज का रस, नींबू का रस बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। उल्टी-दस्त, हैजा हो तो आधा कप पुदीना का रस हर दो घंटे से रोगी को पिलाएं। • ‎आंत्रकृमि में पुदीने का रस दें। • ‎अजीर्ण होने पर पुदीने का रस पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है। • ‎पेटदर्द और अरुचि में 3 ग्राम पुदीने के रस में जीरा, हींग, कालीमिर्च, कुछ नमक डालकर गर्म करके पीने से लाभ होता है। • ‎प्रसव के समय पुदीने का रस पिलाने से प्रसव आसानी से हो जाता है। • ‎बिच्छू या बर्रे के दंश स्थान पर पुदीने का अर्क लगाने से यह विष को खींच लेता है और दर्द को भी शांत करता है। • ‎दस ग्राम पुदीना व बीस ग्राम गुड़ दो सौ ग्राम पानी में उबालकर पिलाने से बार-बार उछलने वाली पित्ती ठीक हो जाती है। • ‎पुदीने को पानी में उबालकर थोड़ी चीनी मिलाकर उस...

आंवला लड्डू बनाने की विधि - Amla Laddu Recipe in Hindi

                         आंवला लड्डू बनाने की विधि                                      (Amla Laddu Recipe in Hindi) आंवला में विटामिन सी और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, इसलिए इसका उपयोग अध‍िक से अध‍िक करना चाहिए। इसके इस्तेमाल से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और हाजमा दुरूस्त होता है। इसके साथ ही यह आंखों और बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही यह बच्चों को भी बहुत पसंद आता है। आंवले की इन्हीं विशेषताओं को देखते हुए पिछले दिनों आंवले का मुरब्बा बनाने की विध‍ि बताई गयी थी। उसी क्रम में आज आंवले का लड्डू बनाने की रेसिपी प्रस्तुत है। आवश्यक सामग्री:   "आंवला लड्डू बनाने की विधि - Amla Laddu Recipe in Hindi" आंवला-500 ग्राम, चीनी-500 ग्राम, बादाम-50 ग्राम (पीस कर पाउडर बनाया हुआ), काजू-50 ग्राम (बारीक कतरे हुए), देशी घी-चार बड़े चम्मच, इलायची पाउडर-आधा छोटा चम्मच, जायफल पाउडर-आधा छोटा चम्मच। आंवला लड्...